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Where Am I going?

Sometimes I think are we really going in right direction?? then I think
"साला ये पढ़ाई लिखाई सब फ़ालतू का चिक्कलस है रे, अपुन को अक्खी दुनिया बोलता कि तु बस ठीक से पढ़ाई करने का और अच्छी नौकरी लगने का मांगता , फ़िर सब ठीक हो जाएगा और लाइफ एकदम सेटल। पर नौकरी तो अपन साला चाहता च नहीं , अपुन को तो फूल संतुष्टि और हैप्पी लाइफ मांगता है, जो कि साला पढ़ाई–लिखाई से घंटा नहीं मिलने वाला।"
थोड़ा मज़ेदार बनाने के लिए भाई की बोली में लिख डाला,, पर बात तो सही है जब हमें कोई अच्छी नौकरी मिल जाएं तब भी मन नहीं भरता, उसके आगे और दूसरी ख्वाहिशें पनपने लगती हैं, फ़िर तीसरी फ़िर चौथी...  मतलब कभी अंत नहीं तुम्हारे लालच का यहां तक कि साला तुमको सीबीआई का डायरेक्टर क्यों न बना दे, तब भी तुम रिश्वत लोगे। अबे जाना किधर है तुमको? करना क्या चाहते हो गुरू? किधर लेके जाएगा ये सब?
ये ख्याल वैसे तो मेरे है, लेकिन हर उस व्यक्ति के मन में उठते होंगे, जो अपनी अच्छी–खासी खुशहाल जिंदगी की वाट लगा के बैठा है, सिर्फ़ नौकरी के लिए।
नोट:– पढ़ाई–लिखाई से मतलब उस शिक्षा से नहीं है जो किसी भी व्यक्ति के विकास मे…

यमन में अकाल, क्या फ़िर से बंगाल? (विश्व आहार दिवस)

1943 का बंगाल–अकाल। माना उस हालत से हमें नहीं गुजरना पड़ा, लेकिन आज जब उसकी तस्वीरों पर नज़र जाती हैं तो रूह कांप जाती है।  इसकी गिनती मानव इतिहास की सबसे भयानक आपदाओं में की जा सकती है। इसमें कलकत्ता की सड़कें हड्डियों के ढांचों से भर गई थी। मुझसे तो लिखा भी नहीं जा रहा, गूगल पर सर्च करके आप ख़ुद तस्वीरें और जानकारी प्राप्त कर सकते हो।
बंगाल अकाल की इतनी भयावहता का कारण प्राकृतिक तो था ही लेकिन वैश्विक मानवता के ठेकेदारों की अनदेखी ने इसमें घी डालने का काम किया था। विंस्टन चर्चिल जिसे द्वितीय विश्वयुद्ध का हीरो माना जाता है उसकी क्रूरता के तो क्या कहने!
आज 75 साल बाद कुछ ऐसे ही हालात यमन में बनें है। यमन ऐतिहासिक रूप से विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक , लेकिन आज वहां भयंकर अकाल है, और इसका कारण प्राकृतिक नहीं बल्कि वहां पर पैदा हुए युद्ध जैसे हालात है। यमन में छिड़ा है गृहयुद्ध जिसे हम दो राजनीतिक शक्तियों का आपसी युद्ध भी कह सकते हैं, जिसमें सऊदी अरब और अमेरिका का हस्तक्षेप भी जगजाहिर है। आज जिसके पास पैसा है उसके पास पावर होती है, और जिसके पास पावर है उसके खिलाफ़ कोई नहीं बोल…

बाबागिरी

अब तक बहुत से बाबाओं के संपर्क में आ चुका हूं, जिनको पढ़ता तो ऐसा लगता मानो बंदे की बात में दम है और ये शख़्स सही में जिंदगी की नैया पार लगवा देगा। ये ऐसे बहुत से तरीक़े बतलाते हैं जिनसे इस मायारूपी संसार के सारे बंधन खुल जाएंगे, परंतु क्या मतलब उन तरीकों का जो मुक्ति के लिए हो, लेकिन खुद ही बंधन बन जाए, उन तरीकों का ही एक नशा सा छा जाए। ये सिर्फ़ क्षणिक ख़ुशी और शांति देते हैं।  पहले मुझे बाबाओं की दुनिया का पता नहीं था, फिर धीरे–धीरे मुझे ऐसे बाबाओं के बारे में समझ आने लगा, कि कैसे ये एन–केन–प्रकारेन लोगों के लालच, भय, और शांति पाने की कामना का ग़लत फ़ायदा उठा उन्हें गुमराह करते हैं। ये सिर्फ़ आज ही नहीं हजारों सालों से और सिर्फ़ भारत में ही नहीं सारी दुनिया में लोगों को मूर्ख बनाते फिर रहे हैं। और इसका एक बड़ा कारण मनुष्य की अपने आप से कभी संतुष्ट न होने वाली प्रकृति है। हम कितने ही श्रेष्ठ क्यों न हो अपने से भिन्न लोग अक्सर हमें प्रभावी लगते हैं।  कोई दूर–देश जगह से आया आदमी क्यों न उसकी उसके जानने वालों में कोई औकात न हो, वो हमें कुछ ज्ञान पेल देता है और हम उसे उस जगह का प्रतिनि…

साइबर दुनिया – एक भुलभुलैया

पहले कैंब्रिज एनालिटिका,
अब नमो ऐप और कांग्रेस की वेबसाइट/ऐप

इससे पहले भी जब आधार को लेकर निजता की बात आती थी तो मुझको बहुत हंसी आती थी, क्योंकि जो जानकारियां ये आधार से लीक होने की बात करते थे उनमें से ज्यादातर तो पहले ही ऑनलाइन सर्वर पर स्टोर हो चुकी हैं।
यूजर्स के लिये ये पूरा खेल एक भूलभुलैया जैसा हो गया है। आप कोई ऐप डाउनलोड करो और आपकी सारी जानकारी दूसरे हाथों में पहुंचने का रास्ता खुल जाएं।
ये तो निजता के अधिकार की जबरदस्त धज्जियां उड़ने जैसा है।
इसके लिए मैंने पहले भी साइबर सुरक्षा और इंटरनेट नॉलेज के प्रति कई बार सचेत किया।
आईटी मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय को कई बार ट्वीट करके #CyberSecurity &  #InternetAwareness को हमारे स्कूल पाठ्यक्रम में डालने भी कहा है। पर जब लोगों की अज्ञानता से अगर इन्हें ही फायदा हो रहा तो ये क्यों जागरूकता लाना चाहेंगे।
लेकिन अब इन सब के बीच सबसे अच्छी बात यही है कि लोगों का ध्यान इस ओर गया है,
और उम्मीद है कि लोग अब ख़ुद से जागरूक होंगे।
एक बात और बता दूं इंटरनेट अब तक का सबसे बेहतरीन आविष्कार है, आपको जो भी जानना है, सब इंटरनेट पर मौजूद है, सब…

विश्व जल दिवस विशेष – इतिहास से समाधान

आज विश्व जल दिवस है।
जल संकट को लेकर बहुत सी समस्याएं है जो अक्सर सुनने मिलती हैं आज तो विशेष दिन है तो ज्यादा ही मिलेगी। मैं ध्यान पानी को लेकर कुछ अलग तथ्यों पर ले जाना चाहूंगा।
भारत में जल संकट वो समस्या है जो हर साल लेकिन एक विशेष मौसम में होती है मतलब अप्रैल, मई, और जून ! बाकी समय तो हम बेइंतहा जल की बर्बादी कर सकते हैं। ध्यान हमें बस यहीं देना है कि जो पानी बाकी मौसम में बहकर समुद्र में चला जाता है उसे किसी भी तरह से जमीन के भीतर पहुंचा सके। पहले ये समस्या इतनी विकराल नहीं थी क्योंकि सीमेंटीकरण इस हद तक नहीं हुआ था। आज हर जगह सीमेंटीकरण हो जाने से पानी धरती के गर्भ में नहीं पहुंच पा रहा।
जल संरक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक उपाय तो बस वन संवर्धन और वृक्षारोपण हैं। इसके अलावा वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अपनाना बहुत ही कारगर उपाय है। पर इसको लेकर मुझे कोई भी कारगर उपाय दिख नहीं रहे जमीनी स्तर पर।


सरकार सभी को 2022 तक घर दिलवाने का दावा कर रही  इसका तो पता नहीं दिलवा पाएगी या नहीं पर इसमें वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का न होने सरकारी दूरदर्शिता की कमी को प्रदर्शित कर रहा।
स्मा…

सोशल मीडिया पर परिपक्वता के लिए जरूरी पड़ाव

ज्यादातर लोग सोशल मीडिया के बचपन में है अभी। वयस्क बनने के लिए सबको कुछ पड़ावों से गुजरना होगा ।
 जैसे दक्षिणपंथी, वामपंथी, जातपंथी, धर्मपंथी, विदेशपंथी, स्वदेशपंथी, इतिहासपंथी, विज्ञानपंथी आदि। इन सब पंथियों से आगे बढ़ जाओ फ़िर देखो कैसे आजाद भारत का एक आजाद पंछी निकलता है।

India & Israel Signed MoUs

The best deal is on #Cyber Security as per MoU between India & Israel.
Because we as a super power in IT we must have now Regulations and Authority to save our future based system specifically defence system. & as I know Israel has brilliant expertise in Cyberspace. History of Israel also shows they are much reliable than any other country for India.
Tomorrow it will be lesser war on ground but on 0 & 1 . & It started & continued too without any notice or announcement.
As reported Yesterday Pakistani Hackers attacked Twitter 🐦 Handle of India's UN Envoy Mr. Akbaruddin.